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राहु रत्न गोमेद को कब, क्यों और कैसे करें धारण

राहु रत्न गोमेद को कब, क्यों और कैसे करें धारण

राहु एक छाया ग्रह है। इसका अपना कोई अस्तित्व नहीं है, यह जिस भाव, राशि, नक्षत्र या ग्रह के साथ से जुड़ जाता है, उसके अनुसार ही अपना फल देने लगता है। राहु जब नीच का या अशुभ होकर प्रतिकूल फल देने लगता है तो ज्योतिष के जानकार लोग गोमेद पहनने का सुझाव देते हैं। गोमेद राहु का रत्न है, इसे पहनने से लाभ और हानि दोनों हो सकते हैं। इसलिए गोमेद पहनने से पहले उसके बारें में अच्छे से जान लेना जरूरी होता है।

गोमेद गारनेट रत्‍न समूह का रत्‍न है जिसे अंग्रेजी में हैसोनाइट कहते हैं। ज्‍योतिष शास्‍त्र में इसे राहू का रत्‍न माना जाता है। यह लाल रंग लिए हुए पीला एकदम गोमूत्र के रंग जैसा होता है। यह भी एक प्रभावशाली रत्‍न है जो राहू के दोषों को दूर करता है।


शुद्ध गोमेद चमकदार, चिकना होता है। पीलापन लिए हुए यह रत्‍न उल्‍लू की आंख के समान दिखाई देता है। यह सफेद रंग का भी होता है जो इतना चमकता है कि दूर से देखने पर ये हीरे जैसा दिखता है। ज्योतिषाचार्य अमूल्य शास्त्रीजी के अनुसार गोमेद बहुत सस्‍ता रत्‍न है लेकिन यह आवश्‍यक नहीं है कि सभी को सही गोमेद जरूरत के समय पर ही प्राप्‍त हो जाए। इसलिए इसके दो उपरत्‍न हैं जिन्‍हें गोमेद के बदले धारण किया जा सकता है। पहला उपरत्‍न है तुरसा और दूसरा साफी। इसके अलावा गोमेद के रंग का अकीक भी गोमेद के स्‍थान पर पहना जा सकता है।


विविध नाम- गोमेद, गोमेदक, तपोमणि, पिग स्फटिक, जटकूनिया, जिरकान आदि।

भौतिक गुण-कठोरता 7Û5 तक,

आपेक्षिक घनत्व 4Û65 से 4Û71 तक,

वर्तनाक 1Û93 से 1Û98 तक, दुहरावर्तन 0Û06 अपकिरणन 0Û048।

कुंडली में ग्रहों की दशा का आंकलन करने के बाद ही राहू का ये रत्‍न धारण करना चाहिए। राहू कुंडली में यदि केंद्र में विराजमान हो अर्थात 1,4,7,10 भाव में तो गोमेद अवश्‍य धारण करना चाहिए। अगर राहू दूसरे, तीसरे, नौवे या ग्‍यारवें भाव में राहू हो तो भी गोमेद धारण करना बहुत लाभदायक होगा। राहू अगर अपनी राशि से छठे या आठवें भाव में स्थित हो तो गोमेद पहनना हितकर होता है। जिन व्यक्तियों की राशि अथवा लग्न वृष, मिथुन, कन्या, तुला या कुम्भ हो उन्हें गोमेद धारण करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य अमूल्य शास्त्रीजी के अनुसार राजनीति में सफलता हासिल करने वाले लोगों को गोमेद धारण करने से विशेष लाभ होता है। यदि राहु द्वितीय, एकादश भाव में हो तो गोमेद पहनने से लाभ होगा किन्तु यदि राहु छठें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो गोमेद सोंच-समझकर पहने अन्यथा हानि हो सकती है।


यदि राहू शुभ भावों का स्‍वामी हो और स्‍वयं छठें या आठवें भाव में स्थित हो तो गोमेद धारण करना लाभदायक होता है। राहू अगर अपनी नीच राशि अर्थात धनु में हो तो गोमेद पहनना चाहिए।जब व्यक्ति के बनते हुये काम में बाधायें आने लगे, भूत-प्रेत का भय हो, किसी ने काम को बांध दिया हो या फिर अचनाक व्यवसाय में हानि हो रही हो तो गोमेद धारण करने से लाभ मिलता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यदि किसी के पास धन रूकता हो तो गोमेद धारण करने लाभ मिलता है। पति-पत्नी में आपसी तनाव रहता हो और तलाक तक की नौबत जाये तो गोमेद पहनने से रिश्ते फिर से मधुर हो जाते है। जिस व्यक्ति का मन परेशान रहता हो, घर में दिल लगे, मन उखड़ा-उखड़ा रहे तो उसे गोमेद अवश्य धारण करना चाहिए।

राहू मकर राशि का स्‍वामी है। अत: मकर राशि वाले लोगों के लिए भी गोमेद धारण करना लाभ फलों को बढ़ाता है। राहू अगर शुभ भाव का स्‍वामी है और सूर्य के साथ युति बनाए या दृष्‍ट हो अथवा सिंह राशि में स्थित हो तो गोमेद धारण करना चाहिए।


राहू राजनीति का मारकेश है। अत: जो राजनीति में सक्रिय हैं या सक्रिय होना चाहते हैं उनके लिए गोमेद धारण करना बहुत आवश्‍यक है। शुक्र, बुध के साथ अगर राहू की युति हो रही हो तो गोमेद पहनना चाहिए।

गलत कामों जैसे चोरी, स्‍मगलिंगआदि कार्यों में लगे लोगों को गोमेद पहनना चाहिए। वकालत, न्‍याय और राज-काज से संबंधित कार्यों में बेहतर करने के लिए भी गोमेद पहनना चाहिए। शेयर मार्केट यानि कि सट्टे बाज़ार में पैसा कमाना इतनी आसान बात नहीं है।



गोमेद रत्न उन लोगों के लिए विशेष लाभकारी है जो काल सर्प दोष से पीड़ित हैं। यदि यह किसी व्यक्ति के लिए उपयुक्त रहता है तो काल सर्प दोष से होने वाले बुरे प्रभावों से बचाव करता है। ज्योतिषाचार्य अमूल्य शास्त्रीजी के अनुसार गोमेद उन लोगों के लिए लाभकारी होता है जो राजनीति, जन संपर्क, दलाली से जुड़े व्यवसाय और प्रबंधन से संबंधित कार्य करते हैं। क्योंकि गोमेद के प्रभाव से शक्ति, सफलता और धन की प्राप्ति होती है।

यदि जन्म कुंडली में राहु की महादशा और अंतर्दशा के समय कोई व्यक्ति गोमेद रत्न पहनता है तो राहु ग्रह के बुरे प्रभावों से उसकी रक्षा होती है।


वे लोग जो पेट संबंधी विकार, सुस्त उपापचय से परेशान हैं उनके लिए गोमेद धारण करना फायदेमंद होता है। क्योंकि यह स्वास्थ्य और शक्ति को भी दर्शाता है। ज्योतिषाचार्य अमूल्य शास्त्रीजी के अनुसार गोमेद के प्रभाव से विरोधियों पर विजय मिलती है और मन में आने वाले निराशावादी विचार भी दूर होते हैं। गोमेद रत्न को धारण करने से भ्रम दूर होता है, वैचारिक पारदर्शिता आती है और राहु की दशा अवधि में सुख प्राप्त होता है। गोमेद धारण करने से भय की भावना दूर होती है और किसी भी कार्य को करने के लिए आत्म विश्वास, प्रेरणा शक्ति मिलती है।

गोमेद या हैसोनाइट स्टोन राहु से संबंधित रत्न है। चूंकि राहु एक क्रूर ग्रह है। ज्योतिषाचार्य अमूल्य शास्त्रीजी के अनुसार ऐसे में यदि इस रत्न को बिना किसी ज्योतिषीय परामर्श और विधिवत तरीके से धारण नहीं किया जाता है तो यह अशुभ फल भी प्रदान कर सकता है।

ऐसी मान्यता है कि महिलाएं अगर कम चमकीला गोमेद पहनती हैं तो उसके बुरे प्रभाव सामने आते हैं।

यह भी माना जाता है कि कम चमकीला गोमेद धारण करने से व्यक्ति की प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व पर बुरा असर पड़ता है।


यदि कोई व्यक्ति बहुरंग वाला गोमेद रत्न धारण करता है, तो उसे स्वास्थ्य और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

वह गोमेद रत्न जिस पर गहरे दाग होते हैं, यह दुर्भाग्य या दुर्घटना की संभावना को दर्शाता है।


उच्च वर्ग-जो गोमेद स्वच्छ, पारदर्शक, गोमूत्र के समान पीलापन लिए हुये लाल रंग का बराबर कोण वाला,चमकीला, चिकना सुन्दर हो, उसे उच्च वर्ग का गोमेद कहा जाता है।

मध्यम वर्ग-ऐसा गोमेद भूरापन लिए हुये लाल रंग का होता है।

निम्न वर्ग-जो गोमेद खुदरापन लिए हुये अपारदर्शी, छायारहित छींटो से युक्त पीले कॉच के समान दिखाई देने वाला हो, वह निम्न वर्ग का गोमेद कहलाता है।

यदि गोमेद में किसी प्रकार का धब्बा हो तो उसको धारण करने से आकस्मिक मृत्यु का भय बना रहता है। अगर गोमेद में लाल रंग के छींटे दिखाई दे तो वह आर्थिक नुकसान कराता है एंव पेट की समस्यायें उत्पन्न करता है। ज्योतिषाचार्य अमूल्य शास्त्रीजी के अनुसार यदि गोमेद में किसी प्रकार का गड्डा दिखाई दे तो वह पुत्र व्यापार को हानि पहुंचाता है। यदि गोमेद में चीरा या क्रास हो तो वह शरीर में रक्त सम्बन्धी विकार उत्पन्न करता है। अगर गोमेद में किसी प्रकार की कोई चमक हो तो शरीर को लकवा भी हो सकता है।


गोमेद को गोमूत्र में 24 घण्टे के लिए रख दे तो गोमूत्र का रंग बदल जायेगा। ऐसा गोमेद अच्छा माना जाता है। असली गोमेद को लकड़ी के बुरादे में रगड़ेगे तो उसकी चमक घट जायेगी।गोमेद रत्न की पहचान करना उन लोगों के लिए बहुत ही आसान है, जो रत्न के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। गोमेद की दिखावट (गर्माहट-तरंग का प्रभाव) और रंग (नारंगी-लाल,भूरा-लाल, नारंगी-पीला) का विश्लेषण कर रत्न की गुणवत्ता के बारे में पता लगाया जा सकता है। हालांकि रत्न 100 फीसदी असली है इसका पता रत्न की क्वालिटी को मापने वाले यंत्र रेफ्रेक्ट्रोमीटर और स्पेक्ट्रोस्कोप से ही ज्ञात हो सकता है। हैसोनाइट स्टोन यानि गोमेद रत्न उसकी गर्माहट और तरंग के प्रभाव से पहचाना जा सकता है, जो कि दिखने में अपेक्षाकृत धुंधला प्रतीत होता है। एक आम आदमी जिसे रत्न के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है, उसके लिए रत्न की गुणवत्ता का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है।


हैसोनाइट या गोमेद रत्न को शनिवार के दिन स्वाति, आर्द्रा अथवा शतभिषा नक्षत्र में पहनना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप शुक्ल पक्ष के किसी भी शनिवार को शनि की होरा में गोमेद पहन सकते हैं। गोमेद को केवल चाँदी की अंगूठी या लॉकेट में ही पहनना चाहिए। कुछ मामलों में ज्योतिषीय परामर्श के बाद पंच धातु के मिश्रण से तैयार अंगूठी में भी गोमेद रत्न को डालकर पहना जा सकता है। ज्योतिषाचार्य अमूल्य शास्त्रीजी के अनुसार शनिवार के दिन अष्टधातु या चॉदी की अंगूठी में जड़वाकर षोड़षोपचार पूजन करने के बाद निम्न ''ऊॅ रां राहवे नमः" मन्त्र की कम से कम एक माला जाप करके मध्यमा उंगली में धारण करना चाहिए।

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